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'पत्रकारों की हत्या चौंकाने वाली', गाजा के अस्पताल में हमले के बाद आया भारत का रिएक्शन_我的网站

A | जागरण संवाददाता, जौनपुर। बेंगलुरू में आई इंजीनियर अतुल सुभाष मोदी का मामला एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। उसने नौ दिसंबर 2024 को बेंगलुरू स्थित अपने आवास पर पत्नी व ससुराल वालों की प्रताड़ना से तंग आकर आत्महत्या कर लिया था। यह रिपोर्ट अतुल के भाई विकास ने दर्ज कराई थी।,मृत अतुल के पिता पवन मोदी व मां अंजू देवी ने गुरुवार को जौनपुर दीवानी न्यायालय पहुंचे और अपने अधिवक्ता के माध्यम से परिवार न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश की अदालत में उपस्थित हुए। अतुल की मां अंजू ने अपने पांच वर्षीय पौत्र व्योम के लिए गार्जियन एंड वार्ड्स एक्ट के तहत व्योम की मां निकिता सिंघानिया के खिलाफ दावा दाखिल किया। कोर्ट ने नोटिस जारी करते हुए अगली सुनवाई के लिए 15 अक्टूबर तिथि नियत की है।,यह भी पढ़ें : वाराणसी में दो बच्चियों पर कुत्तों के झुंड ने किया हमला, देखकर खड़े हो जाएंगे रोंगटे, देखें वीडियो... अतुल के पिता पवन मोदी ने बताया कि वह तथा उनकी पत्नी अंजू अपने पोते व्योम के लिए दीवानी न्यायालय आए हैं। परिवार न्यायालय में मुकदमा दाखिल किया है। उनका पोता अब पांच साल का हो चुका है। उसकी जन्मतिथि 20 फरवरी 2020 है। उन्होंने बताया कि बेटे की आत्महत्या के बाद दूसरे बेटे विकास ने निकिता सिंघानिया, उसकी मां निशा, भाई अनुराग व बड़े पिता सुशील के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने का मुकदमा दर्ज कराया था जिसमें जल्द ही आरोप पत्र बेंगलुरू की अदालत में दाखिल हो जाएगा।,बताया कि बेटे की चौथी अंतिम इच्छा थी कि व्योम हम लोगों के साथ रहे जिससे उसका जीवन बेहतर हो सके। उसी की अंतिम इच्छा पूरी करने के लिए हम लोग न्यायालय आए हैं। उन्होंने बताया कि निकिता ने हम लोगों पर दहेज उत्पीड़न व घरेलू हिंसा का जो मुकदमा यहां दीवानी न्यायालय में दाखिल किया था। उसमें उच्च न्यायालय ने स्थगन आदेश दिया है। उनके अधिवक्ता ने बताया कि घरेलू हिंसा के मुकदमे में 29 सितंबर तिथि नियत है।,यह भी पढ़ें : 14 शहरों में दिखाई जाएगी बनारस के फिल्मकार ज़ैग़म इमाम की फिल्म, जागरण फिल्म फेस्टिवल में "द नर्मदा स्टोरी" का वर्ल्ड प्रीमियर दहेज उत्पीड़न का मुकदमा एसीजेएम प्रथम की अदालत में चल रहा है। भरण-पोषण का मुकदमा अतुल के खिलाफ दाखिल किया गया था। कोर्ट ने 40 हजार बेटे व्योम के भरण-पोषण के लिए देने का आदेश दिया था। जो अतुल की मौत के बाद महत्वहीन हो गया है। पवन मोदी ने बताया कि हम लोग पुलिस की कार्य प्रणाली से बिल्कुल संतुष्ट नहीं हैं। न्याय व्यवस्था से भी हम लोग संतुष्ट नहीं हैं। निकिता ने आज तक फोन नहीं किया। हम लोग अपनी दुकान से अपना गुजारा करते हैं। व्योम से आज तक हम लोगों से कोई बात नहीं हुई।,यह भी पढ़ें : सारनाथ के कालोनाइजर महेंद्र की हत्या मामले का मुंबई से जुड़ा कनेक्शन, 28 काल से मिला क्लू。 डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। गाजा के नासेर अस्पताल में इजरायली हमले में पांच पत्रकारों सहित 21 लोगों की मौत ने दुनिया को झकझोर कर रख दिया है। भारत ने इस हमले को हैरान करने वाला और गहरा अफसोसजनक बताया है।,विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत हमेशा से युद्ध में आम नागरिकों की मौत की निंदा करता रहा है। इस हमले में अल जजीरा के मोहम्मद सलामा, रॉयटर्स के कैमरामैन हुसाम अल-मसरी और फ्रीलांस पत्रकार मारियाम अबु दक्का की जान गई। यह हमला डबल-टैप अटैक था, जिसमें एक के बाद एक दो हमले किए गए।,भारत ने इस घटना पर सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि पत्रकारों की हत्या निंदनीय है। जायसवाल ने बताया कि इजरायली अधिकारियों ने इस हमले की जांच शुरू कर दी है। दूसरी ओर, इजरायल के प्रधानमंत्री कार्यालय ने इसे दुखद भूल करार देते हुए पत्रकारों, मेडिकल स्टाफ और आम नागरिकों के काम को अहम बताया है। लेकिन सवाल यह है कि आखिर यह हमला हुआ क्यों और इसके पीछे की वजह क्या थी?,इजरायल की सेना (आईडीएफ) ने दावा किया कि नासेर अस्पताल के परिसर में हमास ने एक सर्विलांस कैमरा लगाया था, जो उनकी गोलानी ब्रिगेड की गतिविधियों पर नजर रख रहा था। इस कैमरे को नष्ट करने के लिए ड्रोन हमला किया गया। इसके बाद सैनिकों को लगा कि वहां राइफल स्कोप है, जिसे उन्होंने तत्काल खतरा समझा और टैंक से चार गोलों की फायरिंग की। इजरायल का कहना है कि मारे गए 21 लोगों में से 6 आतंकी थे, जिनमें एक वह शख्स भी था, जो 7 अक्टूबर 2023 के हमले में शामिल था।,लेकिन यह दावा कई सवाल खड़े करता है। अल जजीरा के पत्रकार तारिक अबु अज्जौम ने बताया कि इस हमले ने पूरे इलाके में दहशत फैला दी। नासेर अस्पताल में मरीज, पत्रकार और आम लोग डर के साये में हैं। अस्पताल जैसे सुरक्षित स्थान पर हमला, वह भी डबल-टैप तरीके से, अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का उल्लंघन है। पहला हमला इमारत के ऊपरी हिस्से पर हुआ और जब पत्रकार व बचावकर्मी सीढ़ियों पर पहुंचे तो दूसरा हमला हुआ।,यह भी पढ़ें- टैरिफ की वजह से मुसीबत में पड़ गए ट्रंप! भारत के बाद यूरोपीय देशों ने अमेरिका के लिए रोकी डाकसेवा。
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Published on:19:29:26
















